Pooja Tiwari
वही ख़्वाब-ए-परेशान है, वही काजल की ज़ुल्मत है,
मेरी आँखों की बस्ती में, बस तेरी ही हुकूमत है।
दिए की लौ सा जलता है, ये काजल रात भर ‘पूजा’,
जिसे तुम नींद कहते हो, वो मुद्दत की मुसाफ़िरत है। ✨🥀
नींद और ख़्वाब के बीच का वो सफ़र, जिसे सिर्फ़ जागती आँखें समझ सकती हैं।
#पूजा 🫰🥀
#हर_घर_खुशहाली
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