उघैती बदायूं- सिद्व बाबा इंटर कालेज शरह बरौलिया के मैदान में चल रही राम कथा चौथे दिन कथा व्यास पंकज जी महाराज ने भगवान राम की बाल लीलाओं, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा, अहिल्या उद्धार आदि प्रसंगों का बहुत सुंदर वर्णन किया। विश्वामित्र जी वन में यज्ञ करते हैं लेकिन राक्षस उनके यज्ञ में बाधा डालकर उसको पूर्ण नहीं होने देते हैं । विश्वामित्र जी ध्यानस्थ होकर देखते है तो उन्हें पता चलता है कि दशरथ पुत्र राम स्वयं विष्णु अवतार हैं और उनके बिना राक्षसों का संघार नहीं हो सकता है।
दशरथ जी से राम,लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगते है।भगवान राम रास्ते में तड़का जैसी भयंकर राक्षसी का वध कर देते हैं साथ ही अन्य राक्षसों का वध कर यज्ञ को पूर्ण करवाते हैं।मुनि विश्वामित्र के साथ जाते समय रास्ते में गौतम ऋषि के श्राप वश पाषाण शिला बनी अहिल्या का अपनी चरणरज से उद्धार करते हैं। इसके बाद जनकपुर में विश्वामित्र जी के साथ आगमन होता है।कथा स्थल पर सत्यपाल शर्मा,राजेश शंखधार,देव पाल ठाकुर,अनिल कटिया,टिंकू कटिया,श्री कृष्ण माली,विनीत कटिया,नेत्रपाल,योगेश गुप्ता,चरण सिंह लेखपाल,रविन्द्र कटिया,श्याम विहारी शंखधार,अमित शंखधार,विवेक काकुष्ठ, ऋतु शर्मा,मोनी गुप्ता, स्मृति शर्मा,प्रज्ञा शर्मा आदि श्रोता उपस्थित रहे।

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