सारिका सिंह (मनी )
खता हो गयी इश्क है सजा हो गयी इश्क है
तू इंतकाम न ले ये इश्क है…..
जो मर्जी सजा दे इश्क है,
जान बख्स दे मेरी ये इश्क है…
जो भी कहेगा गुनाह की सजा कबूल है
हाजी ये इश्क है…
मारना ही है तुझको तो तिल तिल न मार
मंजूर है कर दे कत्ल मेरा…..
हांजी ये इश्क है………
badaunexpress.com badaunexpress.com | www.badaunexpress.com
