Piyano
आज दरवाज़े पर मैंने लिख दिया था
अंदर मत आना, मैं दुखी हूँ
ज्ञानवान महबूब ने पढ़ लिया, समझ लिया,
और मेरे लिए ख़ामोशी ओढ़कर लौट गया
मगर वो जो दोस्त था,अनपढ़ सा,
वो अंदर चला आया बेधड़क
क्योंकि उसे अल्फ़ाज़ नहीं,
मेरे दर्द की ज़रूरत समझ आती थी..
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