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उझानी बदांयू 22 दिसंबर।
जिले में बीते एक माह में करीब आठ अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद कराए जा चुके हैं, इसके बाद भी कई सेंटर गोपनीय तरीके से चल रहे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद भी नियमों को ताक पर रखकर उझानी सहित जिले में धड़ल्ले से धंधेबाज अपना काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते इन अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथालॉजी के इस गिरोह पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से नगर में अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथालॉजी बिना पंजीयन सक्रिय हैं। बताया गया कि पंजाबी कालोनी में उत्तराखंड में तैनात एक चिकित्सक के नाम पर एक अवैध अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित है, लेकिन इसे स्थानीय अधिकारियों की शह के चलते बंद नहीं करवा रहे हैं।
हाल यह है कि रिपोर्ट पर नाम और मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं है। इससे मरीज छले जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो अवैध सेंटर संचालक कथित आशा कार्यकर्ताओं को रकम का लालच देकर मरीजों को अस्पताल भेजने के लिए कहते हैं। सामान्य से लेकर गंभीर जांच तक के मरीजों को भेजने के एवज में कमीशन अलग-अलग मिलता है।
अल्ट्रासाउंड के लिए चार सौ लेकर पांच सौ और ब्लड जांच में भी मोटा कमीशन मरीज लाने के एवज में दिए जाते हैं। मरीज और तीमारदारों को जब तक जानकारी होती है, तब तक धंधेबाज अपना काम कर किनारा कर लेते हैं।
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बिना पंजीयन व प्रशिक्षित डॉक्टर के चल रहे अस्पताल
सूत्रों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड सेंटर व पैथालॉजी के अलावा तमाम ऐसे अस्पताल हैं जो पंजीकरण के समय किसी डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल करते हैं। कुछ दिन वह डॉक्टर एक या दो घंटे के लिए ओपीडी में बैठ जाते हैं। बाद में वह अस्पताल डॉक्टर के बजाय झोलाछाप संचालित करने लगते हैं। किसी बड़े अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोग ही ऐसे अस्पतालों में डॉक्टर बन जाते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज से लेकर ऑपरेशन तक करने लगते हैं।
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यही हाल नगर के अवैध अस्पतालों का।
सूत्रों की माने तो नगर में क्लीनिक, पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंग होम मिलाकर करीब 50 संचालित हैं। इनमें लगभग 20 डॉक्टर कार्यरत हैं। शेष अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन गैर चिकित्सक करते हैं। वहां अपनी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर ऑनकॉल प्रैक्टिस करते हैं। इस ऑनकॉल व्यवस्था ने ही अवैध अस्पतालों का जाल मजबूत कर दिया।
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नगर में कई बिना पंजीकरण के पैथाेलॉजी चल रही है। यहां जांच के लिए मशीनें लगी हैं। बताते हैं कि निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों से सेटिंग करके यहां मरीज को ब्लड जांच के लिए लाया जाता है। रिपोर्ट भी हवा-हवाई दी जा रही है।——
बिना वैध पंजीयन के यदि अल्ट्रासाउंड और पैथालॉजी सेंटर व अस्पताल चल रहे हैं तो यह गलत है। ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो इस कार्य में शामिल हैं। जांच के लिए टीम मौके पर भेजेंगे।
-डॉ. रामेश्वर मिश्रा सीएमओ बदांयू।
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