Laxmi Singh 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
“कपड़े उतार कर शरीर की भूख मिटा लेना मोहब्बत नहीं होती…
वह तो बस एक पल का नशा है,
जो सुबह की रोशनी के साथ ही उतर जाता है।
मोहब्बत तो तब दिखाई देती है,
जब एक स्त्री टूट रही हो—और तुम उसका सहारा बनो।
वो स्त्री, जो तुम्हारे सामने अपने दिल,
अपनी कमजोरी, अपने दर्द तक को खोल देती है…
वो तुम्हारी जीत नहीं, उसका भरोसा है।
स्त्री जब तुम्हें अपने शरीर से नहीं,
अपनी आत्मा से अपनाती है—
तो जान लो, उसने खुद से ज़्यादा तुम पर विश्वास किया है।
अगर तुमने उस भरोसे को तोड़ दिया,
तो तुमने सिर्फ़ एक दिल नहीं तोड़ा…
बल्कि उसकी इज़्ज़त, उसका विश्वास, उसका सब्र
और उसकी आत्मा तक को घायल कर दिया है।
बिस्तर पर आने से यह साबित नहीं होता
कि तुमने उसे पा लिया,
बल्कि यह कि उसने तुम्हें
अपने अस्तित्व से भी ऊपर एक स्थान दिया है…
और यह हर पुरुष को समझना चाहिए।”**
— लक्ष्मी सिंह
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