सारिका सिंह (मनी )
प्रेम जब समर्पण से सँवरता है,
तो हर बिछोह भी सम्मान बन जाता है!
दूरी भले मन को थाम ले क्षणभर,
पर स्नेह की लौ
नीलगगन-सी जगमगाती है!
तुम्हारी यादों का स्पर्श
हर रात को उजास में बदल देता है,
विरह का हर काँटा भी दर्द के साथ प्रेम की याद दिलाता है….. ❤️❤️
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