Pooja Tiwari
नफ़रतों के इस नए दौर में भी,
मैं वही पुराना प्यार बांटती हूँ।
क्या मोल चुका पायेंगे इसका,
इसीलिए मैं उनको उधार बांटती हूँ।
छुपा के खंजर फुल बांटते हैं वो,
संभले रहो तुम इसीलिए मैं पूरखार बांटती हूँ।
जल ना जाओ तुम दुनिया की धूप में,
इसीलिए मैं शामें गुलज़ार बांटती हूँ।
#पूजा 🫰🥀
#हर_घर_खुशहाली
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