ताराबाई भोंसले (Tarabai Bhonsle), शिवाजी प्रथम के द्वितीय पुत्र राजाराम की पत्नी थी। राजाराम की मृत्यु के बाद विधवा ताराबाई ने अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी तृतीय का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई। ताराबाई एक अद्धितीय उत्साह वाली महिला थी। उसने मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब से अनवरत युद्ध किया। ताराबाई की प्रेरणा और नीति कुशलता से ही मराठों ने फिर से अपनी शक्ति संचित कर ली थी। शम्भुजी के पुत्र शाहू के उत्तराधिकार माँगने पर ताराबाई एक विकट उलझन में फँस गई थी, क्योंकि वह अपने पुत्र शिवाजी तृतीय को ही राजा के रूप में देखना पसन्द करती थी।
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