सारिका सिंह (मनी )
क्रोध से नफ़रत जन्म लेती है नफ़रत से विचार दूषित होते है विचारों से कर्म दूषित होते है कर्म से यश दूषित होता है यश दूषित होने से निराशा जन्म लेती है निराशा से अनिंद्रा और अनिंद्रा से शरीर क्षीण होता है आत्मा अपवित्र इसलिए गुस्सा सिर्फ किसी के हित तक ठीक है
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