बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जनपद में पत्रकारिता का स्तर गिरने की बात तो हर कोई कह देता है लेकिन पता नहीं जागरूकता और दायित्व की बात को कोई क्यों नहीं समझ पाता। जनपद के किसी नगर, उपनगर, ब्लाक अथवा ग्रामीण स्तर किसी का चिंतन करें तो एक बात पूरी तरह स्पष्ट दिखती है कि हर जगह सडकों की हालत, सफाई की बदहाली, बिजली का रोना और दूसरों पर आरोप थोपना हर जगह मिल जाएगी परंतु जागरूकता और दायित्व पर कोई गौर करने को तैयार नहीं है। यह बात कहने वाले तमाम मिल जाएगें, पत्रकार बने फिरते हो पर बोलने की ताकत नहीं है। नेता बने फिरते हो लेकिन कोई काम कराने की हिम्मत नहीं है। कुर्सी मिलने के बाद अपनों को पहचानना भूल गए, सबको बस अपनी तिजोरी को भरना याद है आम आदमी की जरूरत और समस्याओं की तरफ देखने की फुरसत किसी के नहीं है। लेकिन इस पर गौर करने वाला कौन कि गंदगी के लिए उनकी कुछ जिम्मेदारी है अथवा नहीं। बिजली का बिल जमा करना किसकी जिम्मेदारी है, यह बात कहने वाले बहुत हैं कि स्मार्ट मीटर नहीं लगवाएगें लेकिन यह बात कहने वाला मुश्किल से मिलेगा कि बिजली का बिल समय से जमा करेगें। नालों पर दुकान बनाकर कारोबार करने वाले जब सफाई व्यवस्था पर प्रश्नचिंह लगायेगें तो कैसा लगता है यह अपने दिल से पूछना।
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