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अब तो हर पहर तेरी यादों का पहरा है,
दिल के वीराने में बस तेरा ही चेहरा है।
सन्नाटे की रातों में गूंजती है तन्हाई,
ख़्वाबों की गलियों में तेरा ही बसेरा है।
मोहब्बत की रौशनी बुझी नहीं अब तक,
चिराग़ नहीं, दिल जला—ये ही सवेरा है।
#siya
#परिंदा
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