Pushpa शब्दों मे जाल नहीं होता है, जाल तो मनुष्य के मन में होता है, जिसे वो खुद बुनता है और उसी जाल में फंस कर जीवन को दुखमय बना लेता है, और पुरा जीवन दूसरों को और परमात्मा को कोसता रहता है