11:12 pm Saturday , 1 August 2026
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कूडा जलाने की युक्ति से कब और कैसे मिलेगी मुक्ति ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जनपद में कूडा जलाने की एक ऐसी प्रथा चल पडी है जो दिन निकलने के साथ जिले में मुख्यालय से लेकर हर कस्बे और गांव तक सुबह की किरणों के साथ देखने को मिला करती है और कूडे के ढेर में लगाई जाने वाली आग को कहीं घरों से कूडा फेकने वाले, कहीं जाडे से छुटकारा पानेे के लिए हाथ तापने वाले और कहीं नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत के सफाई कर्मचारी तथा कूढा उठाने वाले वाहनों पर तैनात कर्मचारी अक्सर दिखाई देते हैं इससे ऐसा लगता है कि हम पर्यावरण के प्रति पूरी तरह लापरवाह हो गए हैं क्योंकि यह सब जानते और मानते हैं कि कूडे के ढेर में कूढे के साथ ढेर में पडी प्लास्टिक और ढेर में पडा वह सामान जलता है जो वातावरण को दूषित करता है और वातावरण के साथ पर्यावरण को दूषित करता है और इससे तमाम बीमारियां पनपती हैं। किसी एक को इसके लिए जिम्मेदार कहना टेडी खीर है और इसके लिए हम सभी को जागरूक होना होगा जबकि सफाई कर्मियों के निंयत्रण का काम देखने वालों के अलावा ग्राम पंचायत के प्रधानों तथानगर पंचायतों एवं नगर पालिकाओं के चेयरमैन को आगे आना होगा।

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