Laxmi Singh “जब कभी सताएगा दर्द-ए-अंधेरा, मैं तुम्हें इश्क़-ए-चिराग से रोशन करूंगी… तेरी साँसों में अपनी खुशबू घोलकर, तेरे सीने पर सर रखकर हर ग़म सोख लूंगी।”