Sugandha Sharma "रूह की ग़ज़ल हो तुम, तुम्हें एहसासों में गुनगुनाते हैं हम, दूर हो .....हमसे तुम, अपने पास ही सदा पाते हैं हम, डूबें ऐसे ही तुममें हर जन्म, तुम्हारे ही बनकर रहना चाहते हैं हम।।" #सुप्रभात_जिंदगी #सुगंधा