Ravina Mishra रातों का खौफ दिन के उजाले ने क्या दिया साए की तरह लेटकर चलना सिखा दिया अपने लहू को निचोड़ के देखूंगी एक दिन जीने के जहर ने मुझको क्या कुछ बना दिया।