बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जिला मुख्यालय से लेकर जिले के उपनगरों ब्लाक और थाना स्तर पर काम भले ही बेशुमार कराये जा रहे हों लेकिन उनमें आम आदमी के मतलब के कौन से काम हैं यह भी सबको अहसास है क्योंकि काम वहीं हो रहे हैं जिनका रास्ता हमारे पालनहारों की तिजोरी के भरने के बाद बाहर निकलने का रास्ता दे दिया जाता है। सडकों की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं। उफनती नालियों की गंदकी से भी कोई अंजान नहीं है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की बात अब तक कई मामलों के सामने आने के बाद जगजहिर हो चुकी है। सपने ऐसे दिखाये जा रहे हैं जैसे आने वाला कल हमारे अलावा किसी का नहीं होगा लेकिन वास्तविकता क्या है इसको सपने दिखाने वाले और सपनों की बात तालियां बजाने वाले सब जानते है। बदायूं को जरूरत है काम की और काम को जरूरत है व्यावार की जबकि व्यापार की जरूरत क्या है इस पर हम सबको चिंतन करते हुए दुरदर्शिता से काम करना होगा।
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