बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं में खाद को लेकर किसानों और खाद विभाग द्वारा अलग – अलग दावों की कहानी किसी के गले नहीं उतर नहीं हैं। प्रशासनिक स्तर से खाद की कमी ना होने का दावा किया जा रहा है तो केंद्रीय मंत्री जनपद में जल्दी खाद की आपूर्ति देने के लिए लिखा पडी कर रहे हैं जबकि किसान खाद की कमी को लेकर मारा मारा घूम रहा है। तीन पक्षों में कौन सच्चा है, कौन दिखावा कर रहा है और कौन नौटंकी दिखा रहा है इसका जवाब तो सम्बन्धित पक्षों का दिल ही जान सकता है परंतु सच तो यह लगता है कि खाद आ रही और खाद जा भी रही है लेकिन किसानों की जगह जनपद में खाद विभाग में तैनात भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा सफेदपोश राजनेताओं के इशारे पर उनके बताये ठिकानों पर जा रही है, यह बात सच तो नहीं लगती परंतु अगर यह सच है तो जिले का भगवान ही मालिक है। खाद बिक्रताओं का अपना अलग दर्द है क्योंकि खाद की आपूर्ति करने वाली कम्पनियों के एजेन्ट दुकानदारों को खेतीहर दवाईयां लेने के साथ सुविधाशुल्क की मांग पूरी होने पर खाद की आपूर्ति कराते हैं और सच तो यह भी है कि खाद विभाग के अधिकारियों को चैकिंग से ज्यादा अपनी तिजोरी भरने और नेता जी को खुश करने की चिंता होगी तो खाद की जरूरत में किसान को परेशान तो होना होगा।
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