8:39 am Sunday , 2 August 2026
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भाले बिजली बनकर कूटे- Ravina Mishra

Ravina Mishra

भाले बिजली बनकर कूटे,
ढालों पर वज्र प्रहार धरे।
विद्युत-वेग सम रण-नर्तन,
शौर्य-शिखर पर चरण खरे।

सिंह-नाद से पर्वत दहके,
शत्रु-दुर्गों के द्वार हरे।
अग्नि-श्वास भर सेनाओं में,
रण-झंकारित सिंहासन हरे।।

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