9:44 am Sunday , 2 August 2026
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मजबूरी – Ravina Mishra

Ravina Mishra

रूकने की तो कुछ को
चलने की मजबूरी है।

पास पड़ा सब जाना जाना
जाना जाना तो अपमाना
मेरी आँखों को आकर्षक
अनजानी यह दूरी है।

रूकने की ,,,मजबूरी है।

पास चलते हैं, तन चलता है
तन चलता है, मन चलता है
मन चलता तो जीवन चलता
चलना नित्य जरूरी है।

रूकने,, , ,मजबूरी है।

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