कार्तिक पूर्णिमा इसे देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष 5 नवंबर बुधवार को मनाई जा रही है। आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं इस तिथि पर शिववास योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इसके अलावा भरणी नक्षत्र भी बना रहेगा, जिसके स्वामी शुक्र ग्रह हैं।
कार्तिक माह की पूर्णिमा हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान-दक्षिणा जैसे पुण्य कार्यों का विशेष महत्व है। शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है, जिसे देवताओं की दीपावली कहा जाता है।
ऐसे में कुछ राशियों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इन जातकों के भौतिक सुख में वृद्धि और करियर कारोबार में तरक्की के योग बन सकते हैं। जिसमें वृषभ, मिथुन, और कन्या राशि जिनके लिए यह लाभदायक रहेगी।
कार्तिक पूर्णिमा कब
कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को 10:38 पर प्रारंभ होगी।
इस तिथि का समापन 5 नवंबर को सायं 6:50 पर है।
तिथि के अनुसार 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मान्य होगी।
कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्त:
गंगा स्नान मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त): प्रातः 4:52 से 5:44 तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 7:58 से 9:20 तक।
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान मुहूर्त समय:-
सायं 5:10 बजे से 7:47 बजे के बीच प्रदोष काल में दीपदान कर सकते हैं। पद्मपुराण के उत्तरखंड में स्वयं महादेव कार्तिकेय को दीपावली, कार्तिक कृष्णपक्ष के पांच दिन में दीपदान का विशेष महत्व बताते हैं। देव दिवाली के दिन दीपदान करने की परंपरा है। इससे सभी तरह के संकट दूर होकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
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