Ravina सारी रात बरसने वाली बारिश की मैं ऑंचल हूँ दिन में कांटों में फैलाकर मुझे सुखाया जाता है, हमने तो बाजारों में दुनिया बेची और खरीदी है हमें कहाँ मालूम किसी को कैसे भूला जाता है।