🕉️🙏 नमस्ते जी🙏🕉️
“आचार्य संजीव रूप *
🚩 आश्विन – कृष्ण – दशमी – २०८२ 🚩
🪷 1 6 सितम्बर 2025* 🪷~~~~~~
दिन —– मंगलवार
तिथि – दशमी
नक्षत्र — आद्रा
पक्ष —— कृष्ण
माह– — आश्विन
ऋतु —- शरद
सूर्य —- दक्षिणायण *उत्तर गोल
विक्रम सम्वत — 2082
दयानन्दाब्द — 201
शक सम्बत -. 1947
कलयुगाब्द,: 5127
सृष्टिसम्वत- 1960853126
सूर्योदय-/सूर्यास्त (दिल्ली- 6ः07/ 6:25(लखनऊ : 5: 52/ 6: 09
सूर्य : कन्या राशि / चन्द्र : कर्क
ब्रह्म मुहूर्त : 4:41 / 5:29
🌹 रूप वाणी
आय के दो भाग अनिवार्य हैं – व्यय और बचत , जो लोग व्यय ही करते हैं बचत कुछ नहीं करते उनका भविष्य अच्छा नहीं होता पर जो लोग व्यय कम कर बचत अधिक करते हैं उनका वर्तमान अच्छा नहीं होता , सही अनुमात 80 – 20
🍅 पहली सुख निरोगी काया
अपने शरीर की बनावट अवस्था कर्तव्य ऋतु और जलवायु का विचार कर उतना ही भोजन करें जो आसानी से पच जाए,भोजन को ढोना ना पड़े
🌷 संजीव रूप
वेदकथाकार,पुरोहित,कवि
-यज्ञतीर्थ- गुधनी-बदायूँ(उप्र)
9997386782
9870989072 –
हिन्दी संकल्प पाठ 🏵
हे परमात्मन् आपको नमन! आपकी कृपा . मैं आज एक यज्ञ कर्म को तत्पर हूँ, आज एक ब्रह्म दिवस के दूसरे प्रहर कि जिसमें वैवस्वत मन्वन्तर वर्तमान है,अट्ठाईसवीं चतुर्युगी का कलियुग वर्तमान है। सृष्टि सम्वत एक अरब छियाननवे करोड़ आठ लाख तिरेपन हजार एक सौ छब्बीसवां है,कलियुगाब्द 5127, विक्रम सम्वत् दो हजार बियासी है,दयानन्दाब्द 2O1 वां है, सूर्य दक्षिण अयन में उत्तर गोल में वर्तमान है ,कि शरद ऋतु *मास आश्विन * कृष्ण पक्ष- तिथि- दक्षमी ,नक्षत्र – आद्रा * है, आज * मंगलवार 16 सितम्बर 2025 को भरतखण्ड के आर्यावर्त देश के अंतर्गत, ..प्रदेश के ….जनपद…के ..ग्राम/शहर…में स्थित (निज घर में,या आर्यसमाज मंदिर में मैं …अमुक गोत्र में उत्पन्न, पितामह श्री ….(नाम लें ).के सुपुत्र श्री .(पिता का नाम लें)उनका पुत्र मैं …आज सुख ,शान्ति ,समृद्धि के लिए तथा आत्मकल्याण के लिए प्रातः वेला में यज्ञ का संकल्प लेता हूँ!(ऋत्विक वरण)- जिसके निर्देशक /ब्रह्मा के रूप में आप आचार्य….. श्री का वरण करता हूँ,
🕉️ संस्कृत संकल्प पाठ:🕉
ओं तत्सद्।श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे , एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षाणि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि षड्विंन्शत्युत्तरशततमे सृष्टिसंवत्सरे, पञ्चसहस्त्राणि सप्तविंशत्युत्तरशततमे कलियुगे, द्वयशीति द्विसहस्रतमे वैक्रमाब्दे ,, शाके १९४५ दयानन्दाब्दे( एकाधिकद्वि शततमे ) 201 , रवि दक्षिणायणे, उत्तर गोले शरद ऋतौ, * आश्विन मासे, कृष्ण पक्षे, * ‘ दशमी तिथि, आद्रा : नक्षत्र, * मंगलवासरे तदनुसारम् आङ्गलाब्द 2025 … सितम्बर मासः, 16
दिनाङ्क*।
जम्बूद्वीपे,…
भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर् गते ………प्रदेशे ,……..जनपदे.. ..नगरे……गोत्रोत्पन्नः….श्रीमान्.(पितामह)….(पिता..).पुत्रस्य… अहम् .'(स्वयं का नाम)…..अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शान्ति समृद्धि हितार्थआत्मकल्याणार्थम् ,रोग -शोक निवारणार्थम् . सर्वेषां कृते मङ्गलमयं भूयात्!🙏
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