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तर्पण और दान-पुण्य से पितरों के स्मरण में जुटे श्रद्धालु

बदांयू 13 सितंबर।

पितृ पक्ष के अवसर पर श्रद्धालु घरों में विधिविधान से तर्पण और दान-पुण्य कर रहे हैं। सुबह से ही लोग घर में ब्राह्मणों को बुलाकर भोजन करा रहे हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा देकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

आचार्य राजेश शर्मा ने कहा कि पितृ पक्ष में घर पर तर्पण और दान-पुण्य करना सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना और गाय, कौवे व चींटियों को अन्न देना पितरों की तृप्ति का प्रमुख साधन है। उन्होंने बताया कि श्राद्ध से पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार पर कृपा बनाए रखते हैं और समाज में सहयोग व आपसी सद्भाव की भावना मजबूत होती है।

तर्पण कर रहे रामस्वरूप ने कहा कि पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और यह परंपरा आत्मिक संतोष देती है। रामबाबू ने बताया कि श्राद्ध से पितर प्रसन्न होकर परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। तरूण कुमार ने कहा कि तर्पण और दान हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर है। इससे नई पीढ़ी को संस्कार और जीवन की सही दिशा मिलती है।

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पितृ पक्ष में पूर्वजों की पुण्यतिथि पर पिंडदान के लिए कर्मकांडी पंडितों की मांग अधिक है। हर कोई कर्मकांड के अनुसार पितरों की पुण्य तिथि पर पिंडदान करने में जुटा है। आलम यह है कि एक पंडित को दिनभर में दो से तीन पिंडदान कराने पड़ रहे हैं। पंडित रामस्वरूप शर्मा, दिनेश शर्मा, राघवेन्द्र पाठक, नितिन शर्मा आदि ने बताया कि पितृ पक्ष में उनका दिन पिंडदान कराने में ही गुजर जा रहा है।

आज एक साथ होगा षष्ठी और सप्तमी श्राद्ध
आचार्य राजेश शर्मा के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए तिथि, वार (दिन) का आधार मध्य ग्राह्य के समय पर निर्भर है। इस कारण षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध तर्पण एक ही दिन शनिवार 13 सितंबर को पड़ रहा है। अष्टमी का श्राद्ध तर्पण 14 तारीख दिन रविवार को होगा, जो सुबह 8:41 के बाद करना श्रेयस्कर रहेगा।

प्रदीप प्रजापति

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