बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं के कुछ राजनेतिक संगठनों की हालत देखकर ऐसा है कि समाजसेवा नहीं ठेकेदारी और शक्तिशाली होने का खेल चल रहा है लेकिन इस खेल में पूरी तरह शतरंज के हालात दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि वजीर मात खा रहे हैं और केवल घंटा बजाने की स्थति में हैं जबकि उनकी घेराबंदी करने वाले मौका परस्त भले पैदल दिख रहे हों दवह शह देकर दिन – दूनी और रात चौगनी तरक्की करके अपनी तिजोरियां भरने में लगे हुए हैं। वर्तमान समय में सबसे ताकतवर दिखने वाले संगठन के वजीर इतने सरल हैं जो हर एक को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोडते लेकिन यह भी सही है कि सही हो या गलत वह कुछ बोलते भी नहीं हैं और इसी के चलते उनकी शतरंजी टीम के पैदल मोहरे हर तरफ लूटखसोट मचाये हुए हैं। कभी किले के की तरह मजबूत रहे एक संगठन में वजीर की कुर्सी कहां और वह कहां हैं यह किसी को नहीं पता, बस हां में हां मिलाना है और अपना काम बनाना वाले हालत नजर आते हैं और इसी के चलते वजीर की घेराबंदी करने वालों ने संगठन में अंधेर नगरी चौपट राजा वाला का नाटय मंचन स्थल बना रखा है। इससे पूर्व अपनी मस्ती भरी चाल दिखाकर जलवा दिखाने वाले संगठन मे ंतो शायद वजीर को इस बात का भी अहसास नहीं हैं कि अपना किसकों माने और पराया कौन है, लगता है कि इसी के चलते वह पूरी तरह मौन हैं। आजादी के बाद सबसे अधिक शक्तिशाली दिखने वाले संगठन की बात ना की जाये तो अच्छा है लेकिन वहां तो ऐसी चौसर बिछी हुई दिख रही है जिसमें वजीर चंदा मामा दूर के वाली कहावत बनाते नजर आ रहे हैं। 
























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