Ravina Mishra
कहाँ से चल पड़ी थी मैं
रास्तों का होश ना था
हर मोड़ पे तन्हाई थी
तेरा नाम साथ था
सपनों को सीने से लगा के
हर रात जली जैसे दीया
तेरा साया पास था फिर भी
तेरा नहीं हुआ वजूद मेरा
मैंने चाहा तुझे सवालों से परे
तू जवाबों में उलझा रहा
मैंने छोड़ा खुद को तेरे लिए
तू मुझसे ही दूर रहा
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