Ravina Mishra
मैं खामोश, तुम भी ख़ामोश,
फिर इस सन्नाटे में बोलेगा कौन?
कुछ तो कहना होगा हमें,
वरना साथ छूटेगा कौन?
रूठना,मनाना तो रिश्तों का हिस्सा है,
पर हर बार दिल दुखाना कौन सा किस्सा है?
माना कि लफ़्ज़ नहीं मिलते हर बार,
पर एक मुस्कान में भी छिपा होता है प्यार।
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