जिला संवाददाता सौम्य सोनी की रिपोर्ट —-
हाल ही में प्रकाशित प्रेरणादायक पुस्तक “Victory… At Which Cost?” ने पाठकों के बीच गहन चर्चा को जन्म दिया है। यह पुस्तक न केवल सफलता के सुनहरे पहलू को दर्शाती है, बल्कि उसके पीछे छिपे संघर्ष, मानसिक दबाव और व्यक्तिगत त्याग की गहरी झलक भी प्रस्तुत करती है .यह रचना जीवन के उस पहलू पर प्रकाश डालती है जो अक्सर अनदेखा रह जाता है । पुस्तक का उद्देश्य केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करना है कि क्या सफलता केवल परिणाम है या उसके पीछे की यात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसमें सफलताओं से सीख लेने की प्रेरणायुवाओं में वास्तविक लक्ष्य-निर्धारण की सोच
जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।शिक्षा और खेल मनोविज्ञान के जानकार मानते हैं कि इस तरह की रचनाएँ युवाओं के सोचने का तरीका बदल सकती हैं और उन्हें सिर्फ जीतने नहीं, बल्कि संतुलित और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में प्रेरित कर सकती हैं।
सरल और भावनात्मक लेखन शैली के कारण यह पुस्तक हर उम्र के पाठकों को जोड़ लेती है। यह देशभर के प्रमुख बुकस्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है।इस पुस्तक के लेखक, प्रिंस विशाल दीक्षित, असिस्टेंट प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग, एन.एम.एस.एन. दास पी.जी. कॉलेज, बदायूँ (उत्तर प्रदेश) हैं।प्रिंस विशाल दीक्षित, राष्ट्रीय चैंपियन तथा प्रशिक्षित बॉक्सिंग कोच हैं। शिक्षा, खेल मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य और प्रेरणा विषयों पर कई शोध-पत्र और पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए हैं। खेल और शिक्षा के क्षेत्र में आपका अनुभव और वास्तविक जीवन के संघर्षों की समझ, आपके लेखन को और अधिक प्रामाणिक व प्रभावशाली बनाती है।“Victory… At Which Cost?” केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह एक दर्पण है जो हमें अपनी जीत की असली कीमत पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।


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