Gunjan Agrawal तेरी "जुस्तजू" सिर्फ इतनी सी ही है जैसे... चाय को होती है शक्कर की, फूलों को होती है तितली की, नदी को होती है झरने की, और धरती को होती है मेघों की..!!! गुंजन शिशिर