Ravina Mishra
कल तक कितने हंगामे थे
अब कितनी खामोशी है
पहले दुनिया थी घर में
अब दुनिया से रूपोशी है
पल भर जागे गहरी नींद का
झोंका आया डूब गये
कोई गफलत सी गफलत
मदहोशी सी मदहोशी है
जितना प्यार बढ़ाया हमसे
उतना दर्द दिया दिल को
जितने हीं तुम दूर हुए हो
उतनी हम आगोशी है।
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