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उझानी बदांयू 8 अगस्त।
नगर की गली मोहल्लों में मानकविहीन नन्हे मुन्ने बच्चों के प्ले स्कूल कुकुरमुत्तों की तरह चल रहे हैं,शिक्षा विभाग की इन पर नजर नहीं जाती या कुछ ओर है मामला ?।
नगर की पतली पतली गलियों में भी यह प्ले स्कूल खुले पड़े हैं जहां ई-रिक्शा भी सीधा नहीं जा सकता,ना खेल का मैदान ना बच्चों की सुरक्षा का कोई इंतजाम अभिभावक भी बच्चों को स्कूल जाने की आदत डालने को इन प्ले स्कूलों में बच्चों के एडमीशन करा कर कुछ घंटों को अपने आपको फ्री महसूस करते हैं।
इन प्ले स्कूलों में भी बच्चों के अभिभावकों से अच्छी खासी फीस वसूली जाती है। जबकि इन स्कूलों में कई की तो मान्यता भी नहीं एक दो आया,दो तीन टीचर रखकर लोगों ने अपने घरों के छोटे छोटे कमरों में इन स्कूलों को संचालित कर रखा है।
अपने बच्चों का एडमिशन कराते वक्त अभिभावक भी नहीं देखते कि आपके बच्चों की सुरक्षा की कोई इन स्कूलों में गारंटी है, दो तीन घंटे खेलों में समय बिताकर आया से या खुद लंच खाकर बच्चे घर पहुंच जाते हैं। अभिभावक सोचते हैं बच्चे पढ़ाई करके आ रहें है,ऐसा नहीं सभी प्ले स्कूल ऐसे हे कुछ में बच्चों के खानपान के साथ उढने बैठने के तोर तरीकों के साथ बोलने के तरीकों को भी सही अंजाम दिया जाता है।मगर ऐसे गिने-चुने ही प्ले स्कूल है।
शिक्षा विभाग को इन कुकुरमुत्तों की तरह चल रहे प्ले स्कूलों का भी समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर मानकविहीन स्कूलों को बंद करा देना चाहिए। जिससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण ना हो।
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