Ravina Mishra
सबको फूल और कलियाँ बांटो
हमको दो सूखे पत्ते
ये कैसे तोहफे लाए हो
ये क्या बर्गफरोसी है
रंगें हकीकत क्या उभरेगा
ख्वाब हीं देखते रहने से
जिसको तुम कोशिश कहते हो
वो तो लज्जत कोशी है
होश में सब कुछ देखकर भी
चुप रहने की मजबूरी थी
कितनी मानी खेज ये देखो
हमारी ये बेहोशी है।
:- मजाज
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