बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बीती रात सावन के अंतिम सोमवार की सुबह तक बदायूं मे होने वाली बरसात ने विकास के असली इतिहास को आम आदमी की जुबान पर लाकर रख दिया। ऐसा नहीं कि बरसात के मौसम में बदायूं की सडकों पर पहली बार जलभराव हुआ हो लेकिन जलभराव रोकने हेतु किए जाने वाले प्रयास का परिणाम ढाक के तीन पात नजर आना पूर्व के विकास कार्यो की तरह पानी में बह गए यह बात जनता के दिल को दर्द देने वाली लगती है। शहर में नालों और नालियों की सफाई के साथ जलभराव रोकने के लिए बहुत बडे नाले का निर्माण कराते समय जो दावा किया गया वह तो मिस्टर इंडिया की तरह हवा हवाई निकल गया। आम आदमी यह नहीं कह रहा कि काम नहीं हुआ लेकिन एक बात तो आम आदमी को लगती है कि परिणाम अच्छा नहीं दिख रहा। सही योजना बनाने के बावजूद सही परिणाम ना दिखने से ऐसा लग रहा है कि छह सडका से गांधी ग्राउन्ड और सुभाष चौक से परशुराम चौक तक जलभराव रोकने के सारे प्रयास पूरी तरह विफल हो गए जिसके चलते सडकों पर वहीं जलभराव और वही दुकानों में पानी की कहानी आज भी बनी रही। ं
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