Ravina Mishra
समेटा जा सकता था
जो कुछ बिखर चुका था
दो बोल बोले जा सकते थे
जब मौन उपजा था
थामा जा सकता था हांथ
पांव लड़खड़ाने पर
कुछ किया जा सकता था
प्यार को बचाने को
मगर दो लोगों ने चुना
दो अलग रास्ता
और वो जहाँ से आगे बढे़
वहीं छूट गयी यादें
प्यार और परछाईयाँ।
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