Gunjan Agrawal
मेरे अंतिम पलों में जब तुम आओगे मुझसे मिलने,तब तक शायद ये आंखें पथरा चुकी होंगी तुम्हारी राह तकते-तकते और पसरी हुई होंगी इनमें सिर्फ खामोशी और तुम्हारी प्रतीक्षा,लेकिन फिर भी तुम परहेज न करना मुझे अपने सीने से लगाने में, ताकि मुक्त हो सके मेरी देह आत्मा के बंधन से.!!
गुंजन शिशिर
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