बदांयू 9 जुलाई।
देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास प्रारंभ हो गये है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले 118 दिनों तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य निषिद्ध माने जाते हैं।
शनिवार शाम 6:58 बजे एकादशी तिथि प्रारंभ हुई जो रविवार रात 9:14 बजे तक रही। इस तिथि को विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी से चातुर्मास की गणना शुरू होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में धरती का संचालन भगवान देवों के देव महादेव के संरक्षण में माना जाता है जिससे इस दौरान शिव आराधना का विशेष महत्व होता है।
चातुर्मास में चार मास श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक आते हैं। इन महीनों में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत, मुंडन आदि परंपरागत रूप से नहीं किए जाते। यह चार माह का समय आत्मसंयम, ध्यान, साधना और धार्मिक अनुशासन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चातुर्मास के चारों महीनों में विशेष रूप से श्रावण मास शिवभक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर रुद्राभिषेक करते हैं और उपवास, नियम-संयम का पालन करते हैं।
पंडित राजेश शर्मा के अनुसार चातुर्मास का समापन एक नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस तिथि से भगवान विष्णु की योगनिद्रा समाप्त मानी जाती है और पुनः शुभ कार्यों की अनुमति प्रारंभ हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नवंबर में 2, 3, 8, 12, 15, 16, 22, 23 और 25 तथा दिसंबर में 4, 5 और 6 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। कुल 12 शुभ तिथियों में मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होगी।
प्रदीप प्रजापति
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