2:15 pm Friday , 31 July 2026
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डाक्टर धरती के भगवान तो कब, क्यूं और कहां हो जाते हैं परेशान ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
आज राष्ट्रीय डाक्टर दिवस है और हमारे जीवन में डाक्टर का क्या महत्व है सब जानते हैं और यह भी सच है कि हमारे पूर्वजों और समाज ने इसी को लेकर डाक्टर को धरती का भगवान कहा ओर सम्मान दिया जबकि डाक्टरों ने समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह पूरी निष्ठा से किया लेकिन वर्तमान आर्थिक युग ने मरीज और डाक्टर के बीच ऐसा व्यवसायिक हालात बना दिए जिसका परिणाम दवाओं में कमीशन और मरीज की मौत पर अस्पताल में तोडफोड तथा सौदेबाजी के हालात देखने को मिल जाते है। आज हम डाक्टर की कमाई को तो देखते है लेकिन अस्पताल में दी जाने वाली सुविधाओं प्रदान कराने मंहगे उपकरण और उन पर वाले रखरखाव के साथ कर्मचारियों की लम्बी चौडी फौज पर होने वाले व्यय किसी को नहीं दिखते। आज अगर बदायूं की बात करें तो यह बात कहने वाले बहुत लोग मिल जाएगें कि डाक्टर रात को मरीज देखना तो दूर अस्पताल का द्वार बंद कर देते है और कुछ डाक्टर आपातकालीन फीस के नाम पर मरीजों का लूटने का काम करने है लेकिन जब डाक्टर के अस्पताल पर तोडफोड होती है तो उसको रोकने का प्रयास कराने वाले कहीं नहीं दिखते। लगभग दो वर्ष पूर्व एक महिला मरीज की मौत होने के बाद इंद्रा चौक के समीप अस्पताल से कितनी मोटी रकम लेकर समझौता हुआ और समझौते में किसने – किसने दलाली खाई लिखना मुश्किल है क्योंकि दलाली खाने वालों में तमाम बहुचर्चित चेहरे थे जो अक्सर किसी अस्पताल में तोडफोड की वारदात के बाद पर्दे के पीछे से सारा खेल चलाते हैं और बाद में समझौता कराने के नाम पर दोनों पक्षों से धन लेने के लिए अपनी तिजोरी का मुह खोलकर बैठेे नजर आते हैं।

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