8:19 pm Friday , 31 July 2026
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सरकारी राजस्व का सबसे बडे स्त्रोत मदिरा शौकीनों के नसीब में हर कदम पर ठोकर ?

बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
कोरोना काल के बाद हमारी सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस तथ्य को स्वीकार किया था कि प्रदेश में शराब का व्यवसाय सरकारी राजस्व का सबसे प्रमुख साधन है लेकिन बदायूं में मदिरा के शौकीन के साथ जिले भर में सौतेला व्यवहार होने का आरोप लग रहा है जो सत्य भी लगता है। प्रदेश सरकार की आय के सबसे बडे साधन जिनको आम आदमी की भाषा में मदिरा के शौकीन कहा जाता है और मदिरा के शौकीनों का आरोप है कि जिले में तमाम नगर पालिका और नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायते शराब की दुकानों पर जाने वाले रास्तो की मरम्मत कराने का दायित्व पूरा करने में शराब के ठेके को जाने वाली सडकों को बनाने की जगह नजरंदाज कर रही हैं। मदिरा शौकीनों के अनुसार जिला मुख्यालय पर डह सडका वाला शराब का ठेका हो या रेलवे स्टेशन के समीप अंग्रेजी शराब की दुकान अथवा देशी शराब का ठेका हो, सुभाष चौक का देशी शराब का ठेका हो अथवा गददी चौक वाली अंग्रेजी शराब की दुकान, रजा मार्केट वाली शराब की दुकान और ठेका हर जगह देशी शराब के ठेके और अंग्रेजी शराब की दुकानों को जाने वाली सडकों की हालत बद से बदत्तर हालत में हैं जिसमें शराब पीने अथवा शराब खरीदने वाले मदिरा शौकीनों को जाने के लिए ठोकरें खाने को मजबर होना पड रहा है और यह हालत केवल जिला मुख्यालय पर हो ऐसा नहीं तहसील मुख्यालयों, ब्लाक मुख्यालयों तथा दूर दराज के ग्रामीण अंचलों में स्थापित तमाम देशी शराब के ठेके और अंग्रेजी शराब की दुकानों को जाने वाली सडकों की हालत बहुत बदहाल बनी हुई है जहां सरकारी राजस्य प्राप्ती के सबसे बडे स्त्रोत थोडा सा बहक जाने के बाद सबकी निगाह में आने और चोट खाकर इलाज कराने को मजबूर हो हो जाते हैं।

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