9:10 pm Friday , 31 July 2026
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वजीरगंज की पहचान जमीन से शुरू और तस्करी पर खत्म ?

बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
वजीरगंज जिले का ऐसा उपनगर है जो जिले में अग्रणी राजनीति के लिए पहचाना जाता था। खेडा वाली मैया का मंदिर वजीरगंज की धार्मिक पहचान कहा जाता है। आजादी के संग्राम मंे वजीरगंज क्षेत्र के मतवालों ने अंग्रेजों को जो जलवा दिखाया उसको कौन भूल सकता है। कारगिल के शहीद क्षेत्र के ग्राम इटौआ निवासी हरिओम सिंह का बलिदान किसकों याद नहीं होगा। पूर्व के समय में वजीरगंज की राजनेतिक दूरदर्शिता का आलम यह रहा कि जब इस क्षेत्र के राजनेतिक कांग्रेस से जुडे तो जिले में कांग्रेस के असरार अहमद और उनके पुत्र अवरार अहमद की तूती बोली और जब क्षेत्र के मतदाता भाजपा से जुडे तो भाजपा के राम सेवक सिंह पटेल निरन्तर चार बार बिनावर के विधायक बने जबकि पारसीमन के बाद वजीरगंज वालों की नजर में आबिद रजा हीरो बने तो वह विधायक चुने गए और वजीरगंज के मतदाताओं ने महेश गुप्ता को पसंद किया तो महेश गुप्ता भाजपा के विधायक बनकर प्रदेश की योगी सरकार में राज्यमंत्री बने लेकिन वर्तमान में वजीरगंज को कुछ लोगों की धनलोलुपता ने क्या पहचान दिलाई है जो सरकारी भूमिप र कब्जा कराने की पहचान से शुरू होकर अवैध अफीम की तस्करी वजीरगंज की पहचान बनने की नौबत आ गई है।

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