बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
बदायूं से लखनउ और दिल्ली के साथ लम्बी दूरी की रेलगाडियां चलाने की मांग बरेली – कासगंज रेल मार्ग पर उस आमान परिवर्तन के समय से हो रही है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने बदायूं में आमान परिवर्तन का शिलान्यास किया था। शिलान्यास समारोह में तत्कालीन रेल मंत्री राम विलास पासवान ने कहा था कि बरेली – कासगंज रेल मार्ग पर आमान परिवर्तन पूरा होने के साथ बदायूं से दिल्ली और लखनउ की सीधी रेलगाडिया मिलने लगेगीं और लम्बी दूरी की वह रेलगाडिया बदायूं से निकलेगी तो जनपद का विकास होगा। सत्ता में आने के बाद जिले के भाजपा नेता यही कहते रहे कि अब चली रेल लेकिन 11वर्ष के सुशासन पूर्ण होने के बाद बदायूं का रेल मार्ग आज तक सुनसान पडा है। सर्वे के नाम पर करोडों रूपये डीए और टीए निकल गए लेकिन जब ट्रेन चलने का समय आया तो पत्रावली में रेल के पहिये फिसल गए जबकि बदायूं को रेलगाडियां दिलाने में मिलने वाली असफलता के चलते बदायूं और आंवला भाजपा के हाथ से निकल गए लेकिन जो स्वयं को हमारा अपना होने का दावा करते हैं और वहीं हमारे पालनहार हमें आज तक रेलगाडियां जल्दी चलने के सपने दिखा रहे हैं। अब आम आदमी की समझ में यह बात नहीं आ रही कि ना जाने यह कैसे अपने हैं जो दिखलाते बस सपने हैं।
भाजपा के स्थानीय नेतृत्व को इस बात पर गौर करना चाहिए कि केवल प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री योगी के सहारे कब तक चुनाव की वैतरणी पार लगेगी।
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