आज के युग में ऐसे लोग और तथाकथित अपने हर कदम पर मिल जाएगें अपने काम से आपके पास आएगें दो बाते करेगें और अपना काम कराके चलते नजर आएगें जबकि आपके पास से हटते ही यह कहने से नहीं चूकेगें, ख्ूतिया बनाकर अपना काम कराया मेरी कौन सी रिश्तेदारी है। वर्तमान युग में जब निष्ठा से काम करने वालों को दो टाइम की रोटी के लिए दिन रात एक करना पडता है वहीं तूतक अपना रंग दिखाकर दिन भर में इधर उधर से अपनी बातों के सहारे शाम तक आराम से अपनी जेब भारी कर लेते हैं।
अब यह बात मैं किसी पर आरोप लगाने अथवा टिप्पणी करने को नहीं अपने तजुर्बे से कह रहा हूं। इस वर्ष पांच सितम्बर को बदायूं एक्सप्रेस का नौ वर्ष का सफर पूरा होने के साथ 2 अक्टूबर 2025 को मेरी पत्रकारिता के पचास वर्ष पूर्ण हो जाएगें। पत्रकारिता के इस लम्बे कार्यकाल में आरोप से दूर रहा, किसी विवाद में नहीं फंसा और विज्ञापन हेतु कभी किसी पर दवाब नहीं बनाया तो इसका परिणाम कभी सार्थक नहीं रहा। कामयाबी उन्हीं को मिली जिन्होने दवाब बनाकर विज्ञापन के सहारे अपनी जेब भारी की। मुझे उस समय हंसी भी आती है और दुख भी होता है कि अपने काम के लिए मेरे पास आने वाले जब मुझसे यह पूछते हैं कि अब अखबार में काम कर रहे हो या केवल न्यूज पोर्टेल चला रहे हो लिखते तो अच्छा हो पर आज का जमाना अच्छे लोगों की तरफ देखता ही नहीं है और इसी लिए तुम तरक्की नहीं कर पाये।
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