बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
वैभव और शान की तमाम यादों का अतीत समेटने वाली उझानी की कहानी आज कुछ उलझी नजर आ रही है। विदित रहे कि उझानी को कभी बदायूं जनपद की आर्थिक राजधानी कहा जाता था तो कभी इस क्षेत्र में तमाम शीतग्रहों की स्थापना ने उझानी को जिले का गौरव दिलाने का काम किया। कभी प्रेम मिल ने उझानी की कहानी लिखी तो कभी गत्ता फैक्ट्री क्षेत्र के मेहनतकश लोगों को रोजगार देने का साधन बनी।
कभी रेलवे की आय का जिले में सबसे बडा साधन कहा गया तो कभी बड़े व्यवसाय को लेकर उझानी का नाम सूरत तक छाया रहा तो कभी उझानी की राजनीति की तूती की आवाज और धमक देश और प्रदेश की राजधानी तक सुनाई देती थी।
लेकिन वर्तमान में पिछले 11 दिनों से उझानी की मैंथा फैक्ट्री में लगी आग को लेकर चर्चा में है लेकिन अब तक उस परिवार को काई पूछने वाला तो दूर उस परिवार की ओर कोई देखने वाला नहीं है जिसका मुनेंद्र नामक सदस्य मैंथा फैक्ट्री में होने वाले अग्निकांड की घटना के बाद से लापता है। अग्निकांड के बाद मैंथा फैक्ट्री में तमाम राजनेतिक आए और दौरा किया तथा फोटो खिचवा कर चले गए। आम आदमी की समझ में अब तक एक बात नहीं आई जब उसी रात को सहसवान क्षेत्र में होने वाले अग्निकांड को लेकर सरकारी सहायता 24 घंटे बीतने से पूर्व आ गई तो उझानी की कहानी किसी को क्यों नहीं सुनाई दी। उझानी की मैंथा फैक्ट्री में लगी आग की कहानी में ऐसा क्या है जिसको लोग दबी जवान से चर्चा मे कह रहे हैं कि इसमें कई राज दफन है ?, एक मुनेन्द्र नहीं कई ओर लोग ज़िंदा जलें है ?। अगर ऐसा नहीं तो प्रसाशन व फैक्ट्री संचालन करने वाले उस सच से पर्दा उठाकर तस्वीर स्पष्ट करने का काम क्यों नहीं करते, जो समय रहते चर्चा पर विराम लग जाऐ।
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