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रुद्राक्ष

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॥ रुद्राक्ष ॥
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रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना जाता है- और इसे धारण करने से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। हमारे शास्त्रों में रुद्राक्ष के बारे में जिक्र करते हुए कहा गया है कि रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति भगवान शंकर के आसुओं से हुई थी।

रुद्राक्ष का वृक्ष
रुद्राक्ष के पेड़ हिमालय क्षेत्र,असम और उत्तराखंड राज्य के जंगलो में खूब पाए जाते हैं।
भारत के अलावा ये वृक्ष नेपाल,मलेशिया और इंडोनेशिया में भी पाया जाता है- और इन देशों से इन्हें निर्यात किया जाता है।

रुद्राक्ष के प्रकार

रुद्राक्ष 14 प्रकार के होते हैं। दरअसल रुद्राक्ष में मुख निकले होते हैं- और जिस रुद्राक्ष में एक मुख निकला होता है उसे एक मुखी कहा जाता है और जिसमें 4 उसे चार मुखी और इसी तरह से रुद्राक्ष 14 मुखी होते हैं। हर मुखी रुद्राक्ष की अपनी एक खासियत होती है।
एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मुक्ति मिलती है। इस रुद्राक्ष को कर्क, सिंह और मेष राशि के व्यक्ति को जरूर धारण करना चाहिए।

दो मुखी रुद्राक्ष को शिव और पार्वती का रूप माना जाता है- और इसे धारण करने से इच्छित फल मिल जाता है। कर्क राशि के लोग अगर इसे धारण करें- तो उन्हें अच्छा लाभ मिलता है।
तीन मुखी वाले रुद्राक्ष को त्रिदेवरूप कहा जाता है- और इस रुद्राक्ष को विद्या से जोड़कर देखा जाता है।
चार मुखी को ब्रह्मरूप कहा जाता है और ये चतुर्विध फल देता है।

पंचमुखी रुद्राक्ष को काफी शुभ माना जाता है- और इसे धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं।
मेष,कर्क,सिंह, वृश्चिक,धनु और मीन राशि वालों के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष लाभकारी होता है।

छः मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से शत्रुओं का नाश होता है। इसके अलावा शुक्र ग्रह को शांत रखने के लिए भी इसे धारण किया जाता है।
सात मुखी रुद्राक्ष को कामदेवरूप कहा जाता है- और इसको धारण करने से धन प्राप्ति होती है,और “शनि की साढ़े-साती से रक्षा ” होती है।

आठ मुखी रुद्राक्ष आठ दिशाओं और आठ सिद्धियों को दर्शाता है- और इसे धारण करने से पुण्य मिलता है।

नौ मुखी से हर कष्ट दूर हो जाते हैं।

शास्त्रों में दशमुखी रुद्राक्ष को विष्णु रूप कहा गया है- और इसे धारण करने से कामना पूर्ण हो जाती है।
ग्यारह मुखी एकादश रुद्ररूप है- और इसे पहने से विजय प्राप्ति होती है।
बारह मुखी द्वादश आदित्य रूप है- और ये जीवन में प्रकाश देता है।
तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से किस्मत चमक जाती है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनने से शांति मिलती है।

रुद्राक्ष पहनने के नियम:
रुद्राक्ष पहनने के नियमों के तहत रुद्राक्ष को शुद्ध करके ही धारण करना चाहिए- और इसे श्रावन मास के किसी भी सोमवार,शिवरात्रि,प्रदोष या किसी भी पूर्णिमा के दिन धारण करना शुभ फल देता है।

इसे सुबह के समय धारण करना उत्तम होता है। इसलिए आप इसे सुबह के समय स्नान करने के बाद ही धारण करें।
रुद्राक्ष पहनने के नियमों के अनुसार रुद्राक्ष को धारण करने से सात दिन पहले सरसों के तेल में डाल दें। आठवें दिन इसे सरसों के तेल से निकालकर अच्छे से साफ करें।
फिर इसे पंचामृत (दूध,शहद,दही,शकर,घृत तुलसी और गंगाजल) में डाल दें।
पंचामृत में कुछ देर रखने के बाद आप इसे निकालकर गंगा जल से साफ करें- और इसपर चंदन का तिलक,और चन्दन का इत्र लगा दें। फिर आप इसे धारण कर लें।
रुद्राक्ष को धारण करते समय- आप नीचे बताए गए मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र का जाप 108 बार कर लें।
इन मंत्रों को पढ़ने के बाद अगर रुद्राक्ष को धारण किया जाता है- तो रुद्राक्ष से जुड़ा लाभ जल्द ही मिल जाता है।
नीचे बताए गए मंत्र दिव्य मंत्र और इन मंत्रों को शिवपुराण में लिखा गया है:

ॐ हीं नमः

ॐ ह्रीं नमः

ॐ क्लीं नमः

ॐ क्रौं क्षौ रौ नमः

ॐ हीं हूं नमः

ॐ हूं नमः

रुद्राक्ष पहनने के बाद रखें इन बातों का ध्यान-
रुद्राक्ष पहनने के नियमों के मुताबिक इसे धारण करने के बाद आप- सदैव शाकाहार भोजन का ही सेवन करें।

इसे धारण करने के बाद आप इसकी पवित्रता का खासा ध्यान रखें- और इसे साफ रखें।
कभी भी इसे गंदे हाथों से ना छूएं।
इसे हमेशा नाभि से ऊपर ही धारण करें।

अगर आप एक मुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं- तो आप इसे सफेद धागे में, सात मुखी रुद्राक्ष को काले धागे में- और तेरह मुखी रुद्राक्ष को पीले धागे में ही- डालकर धारण करें।
बाकी रुद्राक्ष को आप लाल धागे,सोने और रजत धातु में डालकर भी धारण कर सकते हैं।

रुद्राक्ष पहनने के लाभ

रुद्राक्ष पहनने से जो प्रथम लाभ जुड़ा हुआ है- वो नकारात्मक ऊर्जा खत्म करने का है। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष पहनने से नकारात्मक ऊर्जा आप से दूर रहती है- और आपका जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
शिवपुराण के अनुसार रुद्राक्ष को धारण करने से आपकी रक्षा कई प्रकार के रोगों से होती है।
इतना ही नहीं किसी प्रकार का रोग लग जाने पर अगर रुद्राक्ष धारण किया जाए- तो वो रोग भी सही हो जाता है। इसलिए एक स्वस्थ शरीर पाने के लिए आप रुद्राक्ष को धारण करें।

शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए लोगों द्वारा कई तरह के उपाय किए जाते हैं। ताकि शनि देव की बुरी दृष्टि उनपर ना पड़े।
अगर आपकी कुंडली में शनि देव की बुरी दशा चल रही है- तो आप रुद्राक्ष को धारण कर लें। रुद्राक्ष को धारण करने से शनि देव की बुरी दृष्टि से आपकी रक्षा होगी- और शनि देव आपको किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे।
रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है!
इसलिए आपके जीवन में अगर कोई समस्या चल रही है- तो आप रुद्राक्ष को जरूर धारण करें।

जिन लोगों को तरक्की नहीं मिल पा रही है,वो लोग रुद्राक्ष को धारण करें। रुद्राक्ष को धारण करने से हर क्षेत्र में तरक्की मिलने लग जाती है- और हर कार्य सफलता के साथ पूरा हो जाता है।
अगर आपकी कोई मनोकामना है- जो पूरी नहीं हो रही है- तो आप एक मुखी रुद्राक्ष को धारण कर लें। एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।
जी हां,रुद्राक्ष पहनने से रक्तचाप और मधुमेह जैसे रोग- शीघ्र नियंत्रित हो जाते हैं।
ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को रक्तचाप और मधुमेह की बीमारी है- अगर वो लोग पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण कर लें- तो रक्तचाप और मधुमेह का रोग नियंत्रित हो जाता है।
इसलिए अगर आपको रक्तचाप और मधुमेह है तो आप रुद्राक्ष को जरूर धारण करें।

जिन लोगों की शादी होने में दिक्कतें आ रही हैं- वो लोग दो मुखी रुद्राक्ष को धारण कर लें।
ये रुद्राक्ष धारण करने से विवाह जल्द होने की परिस्थिती निर्मित होती है- और सच्चा जीवन साथी मिल जाता है।

गूगल से साभार

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