बदांयू 19 मई।
परिषदीय विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने के लिए नई कवायद की जा रही है। अब बच्चा अगर बिना कारण तीन दिन स्कूल से गैरहाजिर रहता है तो बुलावा टोली उसके घर जाकर संपर्क करेगी। साथ ही लंबे समय तक स्कूल से गैरहाजिर रहने पर बच्चों को ड्रॉपआउट की श्रेणी में रखा जाएगा। उनके लिए विशेष कदम उठाने के साथ ही उनके अभिभावकों की काउंसिलिंग भी कराई जाएगी।
परिषदीय स्कूलों में छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और ड्रॉप आउट दर कम करने के लिए लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों की पहचान कर उनके लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। जो बच्चा स्कूल में नामांकित हुआ है और लगातार 30 दिन से अधिक अनुपस्थित रहा है या परीक्षा में 35 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करता है तो उसे ड्रॉपआउट माना जाएगा।
बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश के अनुसार अगर किसी छात्र की अनुपस्थिति छह दिन या उससे अधिक हो तो प्रधानाध्यापक स्वयं बच्चे के घर जाकर परिवार से मिलेंगे। उसके स्कूल वापसी तक निरंतर (फॉलोअप) करेंगे। शिक्षक ऐसे बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं भी संचालित करेंगे ताकि उनकी शैक्षिक कमी दूर की जा सके। अनुपस्थित रहने वाले छात्र-छात्राओं पर अब विशेष निगरानी रखी जाएगी।——*–******—
सरकार ने यह भी तय किया है कि अगर कोई छात्र एक महीने में छह दिन, तीन महीने में 10 दिन, या छह महीने में 15 दिन से अधिक अनुपस्थित रहता है तो उसके अभिभावकों को पीटीएम (अभिभावक-शिक्षक) बैठक में बुलाकर परामर्श दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त अगर कोई छात्र नौ महीने में 21 दिन या पूरे शैक्षणिक सत्र में 30 दिन से अधिक अनुपस्थित रहता है, तो उसे ‘अति संभावित ड्रॉप आउट’ की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे छात्र अगर परीक्षा में 35 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करते हैं, तो उन्हें ड्रॉप आउट मानकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।———–**——————— बेसिक शिक्षा अधिकारी बीरेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार का विश्वास है कि इन उपायों से न केवल स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।———-**—— सोम्य सोनी।
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