Gunjan Agrawal शाम होते ही कुछ चुप्पियां इस कदर मेरे भीतर पसर जाती हैं कि जिन्हें देख रात की तन्हाइयां मेरे और भी करीब आकर मुस्कुराने लगती हैं..!!! गुंजन शिशिर