Gunjan Agrawal ऐसा क्यों है कि तुम्हारा प्रेम भी उस चांद की तरह दिन रोज घटता बढ़ता है,जबकि प्रेम में स्थिरता का मानक होना ही चाहिए..!!! गुंजन शिशिर