Gunjan Agrawal
सुनो…
तुम संग “लुका- छिपी करना मुझे कतई पसंद नहीं, जिस पल मैं तुम्हारे साथ हूं ,सिर्फ तुम्हारी ही हूं, उन पलों को समेटकर सहज लेना चाहती हूं अपने “हृदय के संदूक” में, ताकि हमारी कुछ अच्छी यादों को अपने पास जीवन भर के लिए संचित कर सकूं..!!!
गुंजन शिशिर
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