5:41 pm Wednesday , 22 July 2026
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दूसरों का दायित्व और अपने अधिकार, बाकी बातें हैं बेकार ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
आज हमारा देश गणतंत्र दिवस को बडे हर्षोलास से मना रहा है और बदायूं की हर गली, चौराहों पर भारत माता की जय और गणतंत्र दिवस अमर रहे जयघोष सुनाई पड रहा है क्योंकि इसी गणतंत्र की स्थापना से देशवासियों को मौलिक अधिकार प्राप्त हुए और लगभग हर व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों का ज्ञान है लेकिन दुख की बात यह है किक अधिकारों का सर्वव्यापी ज्ञानधारकों को अपने दायित्व का बोध नहीं है अथवा वह अधिकारों के पर्दे से दायित्व को ढकने का ढोंग करते रहते हैं। आज हमारे जनप्रतिनिधियों का इस बात का ध्यान तो है कि वह वीआईपी हैं लेकिन इस बात को अधिकांश वीआईपी भूल गएए हैं कि जनता के प्रति उनकी जवाबदेही उनका दायित्व है। सरकारी योजनाओं को लागू कराना, समाज के अंतिम कमजोर, निर्बल, निर्धन की सेवा करने के साथ उनको आम आदमी की सुविधाओं और सडकों की बदहाली दूर कराने और क्षेत्र की समस्याओं को शासन तक पहुंचाने का दायित्व उनका है। बदायूं की बदहाली देखकर तो ऐसा लग रहा है कि लम्बी दूरी की रेलगाडियां चलवाने के लिए बदायूं की जनता को प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री योगी की तरह जनता की हर बात निगाह रखने वाले विधायक और सांसद चुनने का रास्ता देखना पडेगा क्योंकि बाहर से आकर बदायूं का सांसद और अपने क्षेत्र से प्रथक क्षेत्र का विधायक बनने वाले तो जनता से पूरी तरह दूर हो गए हैं जबकि अपने क्षेत्र के मूल निवासी को विधायक चुनने के बाद दातागंज में विकास की फसल लहलहाती दिख रही है और बदायूं का दुर्भाग्य यह है कि बाकी क्षेत्रों में हमारे पालनहार हमारे अपने क्षेत्र के मूल निवासी नहीं हैं।

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